आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल के जेट प्लाज्मा की संरचना खोजी

saurabh pandey
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आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वैज्ञानिक और शोध छात्र ने पहली बार ब्लैक होल से निकलने वाले जेट प्लाज्मा की संरचना का पता लगाया है। यह महत्वपूर्ण खोज एरीज के वैज्ञानिक डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय और शोध छात्र राज किशोर जोशी द्वारा की गई है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल (एपीजे) में प्रकाशित हुआ है।

खोज के प्रमुख बिंदु

ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे, और पल्सर जैसे आकाशीय पिंडों से विस्तारित किरणों के रूप में जेट उत्सर्जित होते हैं। वर्षों के शोध के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि यह जेट किस प्रकार के पदार्थ से बने होते हैं।

संरचना की पहचान:

डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय और राज किशोर जोशी ने इस खोज में इलेक्ट्रॉन, पॉज़िट्रॉन (धनात्मक आवेशित इलेक्ट्रॉन) और प्रोटॉन के मिश्रण से बने खगोल भौतिकी जेट की गतिशीलता का अध्ययन किया।

महत्वपूर्ण खोज:

प्रो. दीपांकर बनर्जी, निदेशक एरीज के अनुसार, यह खोज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इस खोज से जेट के ऊष्मा हस्तांतरण की मात्रा, द्रव्यमान घनत्व, ऊर्जा घनत्व और दबाव के बीच संबंध सैद्धांतिक रूप से ज्ञात हो गए हैं।

खोज के परिणाम

इस खोज से ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों के बीच चल रही भौतिक प्रक्रिया के विवरण को समझने में मदद मिलेगी। डॉ. चट्टोपाध्याय और जोशी द्वारा किए गए इस शोध ने ब्लैक होल और उनके जेट के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

ब्लैक होल और जेट प्लाज्मा

ब्लैक होल एक ऐसा खगोली सिंगुलैरिटी है जो अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण जिस किसी भी वस्तु या प्रकार के ऊर्जा को अपने अंदर खींच लेता है, उसे भी लाईट तक विरासत में नहीं छोड़ता। इन गहरी ग्रहणशक्ति क्षेत्रों के साथ जुड़े रहस्यों ने वैज्ञानिकों को सदियों से परेशान किया है।

ब्लैक होल क्या है ?

ब्लैक होल एक गहरा खगोली क्षेत्र होता है जिसका गुरुत्वाकर्षण इतना बलवान होता है कि वह किसी भी प्रकार के ऊर्जा और पदार्थ को अपने अंदर खींच लेता है, जिसके कारण उसकी विशेषता यह है कि वह स्वयं भी ऊर्जा को नहीं छोड़ता। इन क्षेत्रों में गुरुत्वाकर्षण इतना तेज होता है कि ना चाहते हुए भी इसके करीबी वस्तुएँ भी इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति में खिंची जाती हैं।

जेट प्लाज्मा: ब्लैक होल के रहस्यमय उत्सर्जन

जेट प्लाज्मा ब्लैक होल से उत्पन्न होने वाले अद्वितीय धाराओं को कहते हैं जो ब्लैक होल के प्राचीन घटनाओं का अध्ययन करते हैं। इन जेट्स में ऊर्जा की धाराएं उत्सर्जित होती हैं, जिससे ब्लैक होल के प्रकार और प्राकृतिक विशेषताओं को समझा जा सकता है। ये उत्सर्जित धाराएं विभिन्न तत्वों और ऊर्जा के संयोजन से बनती हैं, जिससे इसके गहरे रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान:

यह उपलब्धि एरीज के वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान को मजबूत करेगी और अन्य वैज्ञानिकों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनेगी। इस खोज से ब्लैक होल और उनसे निकलने वाले जेट प्लाज्मा की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जो भविष्य में खगोल भौतिकी के क्षेत्र में नई दिशाओं में शोध करने में सहायक होगी। एरीज के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

ब्लैक होल और उनके जेट प्लाज्मा के रहस्यों के खोलने से न केवल खगोल भौतिकी के वैज्ञानिक माध्यम से नई जानकारी मिली है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थाओं के अनुसंधान कार्य में वैज्ञानिकों का अनमोल योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता है।

source and data – दैनिक जागरण

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