नरला ताताराव थर्मल पावर स्टेशन ने शुरू किए प्रदूषण नियंत्रण उपाय

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उत्तराखंड के चमोली में एवलांच: 57 मजदूर दबे, विशेषज्ञों ने बताई यह वजह

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विश्व पैंगोलिन दिवस: संकटग्रस्त प्रजाति को बचाने की जरूरत

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देश में अधिक कार्बन अवशोषण में हरित आवरण की बड़ी भूमिका

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भ्रष्टाचार प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में  बड़ी बाधा है

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वायु प्रदूषण और उच्च तापमान गर्भावस्था के लिए खतरा

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हिमाचल में घटती बर्फबारी: सेब बागवानों की बढ़ती चिंताएँ और समाधान

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अनचाही बारिश और बढ़ता तापमान बढ़ा रहा है डेंगू के मामले, जानें कैसे लगेगी लगाम

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पृथ्वी का आंतरिक कोर बदल रहा है

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ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल और जलवायु परिवर्तन पर नई चुनौती

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जलवायु परिवर्तन: 2041 से 2060 तक उष्णकटिबंधीय स्थलीय प्रजातियां 54% तक खत्म हो सकती हैं

जलवायु परिवर्तन भविष्य में स्थलीय और समुद्री जानवरों और पौधों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार, अगले 20 वर्षों में लगभग 39% प्रजातियों की कमी आ सकती है। पारंपरिक मॉडलों से की गई भविष्यवाणियों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थानीय प्रजातियों की विविधता 2041 से 2060…

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नई खोज: टारेंटयुला की प्रजाति जलवायु परिवर्तन के कारण संकट में

दक्षिण-पूर्वी एरिजोना के चिरिकाहुआ पर्वतों में टारेंटयुला की एक नई प्रजाति, एफोनोपेल्मा जैकोबी, की खोज की गई है। इस नई प्रजाति की खासियत इसके काले और भूरे रंग के शरीर और पेट पर लाल बाल हैं। हालांकि यह प्रजाति ठंडे पर्वतीय इलाकों में जीवित रहती है, लेकिन बढ़ते तापमान और असामान्य बारिश के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया…

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यूनेस्को की चेतावनी: 2050 तक दुनिया के विभिन्न धरोहर स्थलों में से अधिकतर ग्लेशियर गायब हो सकते हैं

ग्लेशियरों के पिघलने के प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है, जिसमें वैश्विक तापमान का बढ़ना शामिल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1970 के दशक से दुनिया के ग्लेशियरों की औसत मोटाई में लगभग 30 मीटर की कमी आई है। यहाँ तक कि आज भी, ग्लेशियरों का पिघलना अवश्य हो रहा है, जिससे वे धीरे-धीरे अपनी मोटाई खो रहे हैं। यूनेस्को ने हाल…

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अनियंत्रित कार्बन उत्सर्जन का भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्रों में गहरा प्रभाव

अनियंत्रित कार्बन उत्सर्जन उष्णकटिबंधीय वर्षा को तेजी से उत्तर की ओर धकेल रहा है, जिसके कारण आने वाले दशकों में भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्रों की कृषि और अर्थव्यवस्था…

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