






जलवायु परिवर्तन भविष्य में स्थलीय और समुद्री जानवरों और पौधों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है। हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार, अगले 20 वर्षों में लगभग 39% प्रजातियों की कमी आ सकती है। पारंपरिक मॉडलों से की गई भविष्यवाणियों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थानीय प्रजातियों की विविधता 2041 से 2060…
दक्षिण-पूर्वी एरिजोना के चिरिकाहुआ पर्वतों में टारेंटयुला की एक नई प्रजाति, एफोनोपेल्मा जैकोबी, की खोज की गई है। इस नई प्रजाति की खासियत इसके काले और भूरे रंग के शरीर और पेट पर लाल बाल हैं। हालांकि यह प्रजाति ठंडे पर्वतीय इलाकों में जीवित रहती है, लेकिन बढ़ते तापमान और असामान्य बारिश के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया…
ग्लेशियरों के पिघलने के प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है, जिसमें वैश्विक तापमान का बढ़ना शामिल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1970 के दशक से दुनिया के ग्लेशियरों की औसत मोटाई में लगभग 30 मीटर की कमी आई है। यहाँ तक कि आज भी, ग्लेशियरों का पिघलना अवश्य हो रहा है, जिससे वे धीरे-धीरे अपनी मोटाई खो रहे हैं। यूनेस्को ने हाल…
हाल ही में कनाडा की राजधानी ओटावा में प्लास्टिक प्रदूषण पर अंतरराष्ट्रीय…
अनियंत्रित कार्बन उत्सर्जन उष्णकटिबंधीय वर्षा को तेजी से उत्तर की ओर धकेल रहा है, जिसके कारण आने वाले दशकों में भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्रों की कृषि और अर्थव्यवस्था…
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