चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की खोज में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। भारतीय और चीनी वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयासों से चंद्रमा पर पानी के साक्ष्यों की पुष्टि की गई है, जो अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में एक नई दिशा प्रस्तुत करता है।
2009 में भारत के चंद्रयान-1 मिशन के दौरान चंद्रमा पर पानी के साक्ष्य पहली बार सामने आए थे। मिशन के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं के रूप में पानी की उपस्थिति की पहचान की थी। इस महत्वपूर्ण खोज ने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया और चंद्रमा पर संभावित जीवन और संसाधनों की खोज के लिए नई उम्मीदें जगाईं।
हाल ही में, चीनी वैज्ञानिकों ने अपने चांग’ई-5 मिशन के अंतर्गत लाए गए चंद्रमा की मिट्टी के नमूनों का अध्ययन किया। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) और बीजिंग नेशनल लेबोरेटरी फॉर कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स के सहयोग से किए गए इस शोध में चंद्रमा पर पानी के साक्ष्यों की पुष्टि हुई है। यह अध्ययन हांगकांग स्थित जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में 16 जुलाई को प्रकाशित हुआ है।
चांग’ई-5 मिशन ने चंद्रमा के सबसे पुराने बेसिन से दो किलो मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर भेजे थे। इस अध्ययन ने यह पुष्टि की है कि चंद्रमा पर पानी की उपस्थिति के प्रमाण मिले हैं, जो पहले के मिशनों के नमूनों के शोध पर आधारित है। यह नई जानकारी वैज्ञानिकों के लिए चंद्रमा पर संभावित जीवन और भविष्य के मानव मिशनों की योजना बनाने में सहायक साबित हो सकती है।
इस खोज से यह भी संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में चंद्रमा पर स्थित आधारों को पानी की आपूर्ति के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों के लिए स्वायत्तता में वृद्धि हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई जानकारी से चंद्रमा पर जीवन की संभावनाओं का अध्ययन और अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।
Source and data – दैनिक जागरण
