राजधानी में चार बड़ी परियोजनाओं में पेड़ बन रहे बाधा

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नई दिल्ली: दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए कई फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनके निर्माण कार्य को पूरा करने में हरे पेड़ आड़े आ रहे हैं। ऐसे में निर्माण की गति धीमी हो रही है। इनमें से अधिकतर परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा दिसंबर 2023 थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी अब इन्हें पूरा करने के लिए नई समय सीमा दे रहा है। अप्सरा बॉर्डर परियोजना को छोड़कर अन्य परियोजनाएं कब तक पूरी होंगी, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन परियोजनाओं के बीच 538 हरे पेड़ आ रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने ‘ट्री ट्रांसप्लांट पॉलिसी-2020’ में विकास कार्यों के दौरान 80 फीसदी पेड़ों को ट्रांसप्लांट करना अनिवार्य कर दिया है। विकास परियोजना के लिए पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए एक पेड़ के स्थान पर 10 पौधे लगाने का भी प्रावधान है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस प्रक्रिया को वारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना चरण-3 के बीच आने वाले हरे पेड़ों के लिए शुरू कर रहा है। जागृति भी लागू होने के लिए तैयार है, लेकिन अभी तक पेड़ों को हटाने की अनुमति नहीं मिल पाई है।

पीडब्ल्यूडी जिन परियोजनाओं पर काम कर रहा है, उनमें दो सड़कों को वन विभाग ने डीम्ड वन क्षेत्र घोषित किया है। इसमें अप्सरा बॉर्डर से आनंद विहार सिग्नल फ्री परियोजना और नंद नगरी सिग्नल फ्री परियोजना भी शामिल है। डीम्ड वन क्षेत्र घोषित सड़कों से अप्सरा बॉर्डर आनंद विहार कॉरिडोर के बीच आ रहे 113 पेड़ अप्सरा बॉर्डर से आनंद विहार सिग्नल फ्री कॉरिडोर परियोजना के बीच 113 हरे पेड़ आ रहे हैं। दो साल बाद भी लोक निर्माण विभाग इन पेड़ों को हटाने के लिए एनओसी नहीं ले पाया है। अब पीडब्ल्यूडी ने पेड़ों से आच्छादित क्षेत्रों को वैरिकेडिंग करके अलग करने की योजना बनाई है। इस परियोजना को अगले महीने लोकार्पित करने की योजना है। करीब 1440 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर से तीन लाल बत्ती बंद की जाएंगी।

पेड़ों को हटाने की फाइल केंद्र सरकार के पास जाती है, वहां से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली सरकार का वन विभाग एनओसी देता है। जानकारों का कहना है कि यह फाइल अभी केंद्र सरकार के पास है। ये परियोजनाएं उन परियोजनाओं में शामिल हैं, जहां पेड़ आने वाले हैं।

पंजाबी बाग एलिवेटेड कॉरिडोर में 33 पेड़ बने बाधा

इस परियोजना के तहत 500 मीटर 118 पेड़ नंद नगरी फ्लाईओवर की राह में बाधा बन रहे हैं। नंद नगरी-गगन सिनेमा फ्लाईओवर परियोजना के बीच आने वाले छोटे-बड़े मिलाकर 118 पेड़ों को हटाया जाना है। पीडब्ल्यूडी ने पेड़ों को हटाने के लिए करीब दो साल पहले वन विभाग में अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन अनुमति नहीं मिल पाई थी। ऐसे में डेडलाइन बीतने के बाद भी नंद नगरी से गगन सिनेमा जंक्शन के बीच 1.3 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण अभी सिर्फ 50 फीसदी ही पूरा हो पाया है।

मोती नगर फ्लाईओवर का काम तो पूरा हो गया है, लेकिन करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे पंजाबी बाग फ्लाईओवर का काम 10 फीसदी पूरा होने के बाद भी 33 पेड़ बाधा बने हुए हैं। इन पेड़ों को लेकर कुछ लोग दिल्ली हाईकोर्ट चले गए। ऐसे में वन विभाग ने पेड़ों को हटाने के लिए एनओसी जारी नहीं की, अगर पेड़ों को हटाने की अनुमति जल्द मिल जाती है तो अगस्त में काम पूरा हो जाएगा।

सौरभ पाण्डेय

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Source- वीके शुक्ला, जागरण

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