बिहार: गया की ब्रह्मयोनी पहाड़ियों पर औषधीय पौधों की खोज, मधुमेह और मोटापे के इलाज में कारगर

saurabh pandey
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बिहार के गया जिले की ब्रह्मयोनी पहाड़ियों पर शोधकर्ताओं ने औषधीय पौधों की एक महत्वपूर्ण खोज की है, जो मधुमेह और मोटापे जैसे स्वास्थ्य मुद्दों के इलाज में सहायक हो सकते हैं। यह खोज उन पौधों की खोज पर आधारित है जो पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और जिनका वैज्ञानिक मूल्य अब सामने आया है।

गुड़मार: मधुमेह का एक अनमोल इलाज

शोधकर्ताओं ने तीन प्रमुख औषधीय पौधों की पहचान की है, जिनमें प्रमुख पौधा गुड़मार (Gymnema sylvestre) है। गुड़मार को “शुगर-क्रशर” के नाम से भी जाना जाता है। इसमें मौजूद जिम्नेमिक एसिड रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक होता है और यह मीठा खाने की इच्छा को भी कम करता है। इस पौधे का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से किया जाता रहा है और हाल ही में इसे बीजीआर-34 नामक मधुमेह रोधी दवा में शामिल किया गया है। इस दवा में गुड़मार के अलावा दारुहरिद्रा, गिलोय, विजयसार और मंजिष्ठा जैसी औषधियां भी शामिल हैं।

अन्य महत्वपूर्ण पौधे

गुड़मार के अलावा, ब्रह्मयोनी पहाड़ी पर दो और औषधीय पौधे पाए गए हैं – पिथेसेलोबियम डुल्स और जिजीफस जुजुबा। इन पौधों पर अभी भी शोध जारी है, लेकिन इनकी पारंपरिक उपयोगिता और औषधीय गुणों की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिथेसेलोबियम डुल्स और जिजीफस जुजुबा के बारे में यह माना जा रहा है कि वे भी स्वास्थ्य लाभकारी हो सकते हैं, हालांकि इनके गुणों की विस्तृत जानकारी अभी प्राप्त की जानी बाकी है।

पारंपरिक उपचारों का संरक्षण

इस शोध का मुख्य उद्देश्य उन पारंपरिक उपचारों को संरक्षित करना है, जो औषधीय प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाते हैं। शोधकर्ताओं ने पौधों की प्रजातियों की पहचान की है और उनके हर्बल दवाओं के उपयोग पर दस्तावेज तैयार करने का काम किया है। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों को इन पौधों के संरक्षण और खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि ये पौधे विलुप्त होने से बच सकें।

भविष्य की दिशा

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन औषधीय पौधों की खोज से स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई दिशा मिलेगी और मधुमेह, मोटापा जैसे रोगों के इलाज में नई संभावनाएं खुलेंगी। ब्रह्मयोनी पहाड़ियों में किए गए इस शोध के नतीजे इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्रिएटिव रिसर्च थॉट्स में प्रकाशित हुए हैं, और इसके परिणाम चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं।

इस खोज से यह भी स्पष्ट होता है कि पारंपरिक औषधियों के वैज्ञानिक मूल्य को समझना और उनका संरक्षण करना कितना महत्वपूर्ण है, और यह भी कि भविष्य में इन पौधों के और भी उपयोगी गुणों की खोज की जा सकती है।

गया की ब्रह्मयोनी पहाड़ियों पर किए गए इस शोध ने औषधीय पौधों की एक नई महत्वपूर्ण श्रेणी की खोज की है, जो मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों के इलाज में कारगर हो सकती है। गुड़मार, पिथेसेलोबियम डुल्स, और जिजीफस जुजुबा जैसे पौधे पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, और अब वैज्ञानिक अनुसंधान से उनके औषधीय गुणों की पुष्टि हो रही है। गुड़मार, विशेष रूप से, रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में अपनी प्रभावशीलता के लिए जाना जाता है और इसके उपयोग से मधुमेह के इलाज में नया आशा दिखाई दे रहा है।

इस खोज का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे पारंपरिक उपचारों को संरक्षण और प्रोत्साहन मिलता है। शोधकर्ताओं की ओर से की जा रही ये पहलें न केवल औषधीय पौधों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों को इन पौधों के खेती और संरक्षण में शामिल कर एक सतत औषधीय संसाधन बनाने की दिशा में भी योगदान करती हैं।

भविष्य में, इस प्रकार के शोध पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने में मदद करेंगे, और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपचार विधियों की खोज को प्रोत्साहित करेंगे। ब्रह्मयोनी पहाड़ियों में किए गए इस शोध के परिणाम, औषधीय पौधों के वैज्ञानिक मूल्य को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और इसके उपयोग से कई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

Source- अमर उजाला  

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