आइसलैंड में दुनिया का सबसे बड़ा डायरेक्ट एयर कैप्चर एंड स्टोरेज (DAC+S) प्लांट लॉन्च, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम

saurabh pandey
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आइसलैंड ने हाल ही में जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा डायरेक्ट एयर कैप्चर एंड स्टोरेज (DAC+S) प्लांट ‘मैमथ’ का उद्घाटन किया गया है। यह प्लांट स्विस कंपनी क्लाइमवर्क्स द्वारा स्थापित किया गया है और यह अपनी पूर्ववर्ती इकाई ‘ओर्का’ से आकार में कहीं अधिक विशाल है।

DAC+S तकनीक: एक क्रांतिकारी कदम

DAC+S तकनीक वायुमंडल से सीधे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को हटाने का एक उन्नत तरीका है, जो पारंपरिक कार्बन कैप्चर तकनीक से अलग है। पारंपरिक विधियों में CO₂ को आमतौर पर उत्सर्जन के बिंदु पर पकड़ा जाता है, जबकि DAC+S तकनीक वायुमंडल से CO₂ को सीधे खींचती है और इसे गहरी भूगर्भीय संरचनाओं में स्थायी रूप से संग्रहीत करती है। यह तकनीक CO₂ को विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए भी उपयोगी बनाती है, जो इसे अत्यधिक प्रभावी बनाता है।

डायरेक्ट एयर कैप्चर एंड स्टोरेज (DAC+S) प्लांट

डायरेक्ट एयर कैप्चर एंड स्टोरेज (DAC+S) प्लांट एक अत्याधुनिक तकनीक है जिसका उद्देश्य वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को सीधे निकालना और उसे संग्रहीत करना है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत, प्लांट में हवा को सक्शन द्वारा खींचा जाता है, जिसमें CO₂ को विशेष अवशोषक सामग्री द्वारा अलग किया जाता है। फिर इस CO₂ को भंडारण के लिए उपयुक्त स्थान पर भेजा जाता है, जैसे कि भूमिगत भंडारण स्थल, जहां यह दीर्घकालिक रूप से संग्रहीत किया जाता है।

DAC+S तकनीक का मुख्य उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों को कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करना है। यह तकनीक उन क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां मौजूदा उत्सर्जन नियंत्रण विधियाँ पर्याप्त नहीं हैं। DAC+S के जरिए वातावरण में CO₂ की मात्रा को सीधे नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे जलवायु संतुलन में सुधार होता है।

इस तरह के प्लांट का विकास और कार्यान्वयन ऊर्जा, पर्यावरण विज्ञान, और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रमुख तकनीकी प्रगति का हिस्सा है।

CDR तकनीक की महत्ता

कार्बन डाइऑक्साइड हटाने (CDR) तकनीक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो रही है। आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, शुद्ध शून्य CO₂ और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए CDR एक अनिवार्य तकनीक है।

अन्य CDR तकनीकें

  • वनीकरण/पुनर्वनीकरण और मृदा कार्बन जमाव: ये विधियाँ बायोमास और मृदा में वायुमंडलीय कार्बन को स्थिर करती हैं।
  • अपक्षय में वृद्धि: इसमें खनिज युक्त चट्टानों का उपयोग CO₂ को अवशोषित करने के लिए किया जाता है।
  • महासागर आधारित CDR: महासागर निषेचन, महासागर की क्षारीयता में वृद्धि, और तटीय ब्लू कार्बन प्रबंधन जैसी विधियाँ भी शामिल हैं।

चुनौतियाँ

DAC+S तकनीक की कुछ प्रमुख चुनौतियाँ भी हैं। इनमें अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता, उच्च लागत, वायु प्रदूषण, और अधिक भूमि तथा पानी की जरूरत शामिल हैं। महासागर के अम्लीकरण का जोखिम भी एक चिंता का विषय है।

भविष्य की दिशा

‘मैमथ’ प्लांट का उद्घाटन जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। यह नई तकनीक न केवल CO₂ उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में इसके व्यापक उपयोग से जलवायु परिवर्तन की चुनौती को निपटने में भी मदद मिलेगी। इस दिशा में उठाए गए कदमों की सफलताएं और चुनौतियाँ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेतक होंगी।

आइसलैंड में स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा डायरेक्ट एयर कैप्चर एंड स्टोरेज (DAC+S) प्लांट ‘मैमथ’ जलवायु परिवर्तन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस तकनीक के जरिए वायुमंडल से सीधे CO₂ को हटाना और गहरी भूगर्भीय संरचनाओं में स्थायी रूप से संग्रहीत करना संभव हो सकेगा। हालांकि, इस तकनीक की प्रभावशीलता और व्यापक उपयोग के लिए कई चुनौतियाँ, जैसे अत्यधिक ऊर्जा की जरूरत, उच्च लागत, और संभावित पर्यावरणीय प्रभाव, का समाधान किया जाना आवश्यक है। ‘मैमथ’ प्लांट की सफलता जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हो सकती है, जो भविष्य में CO₂ उत्सर्जन को नियंत्रित करने और पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

source and data- vision ias magazine

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