विनाश की राह पर मानवता: बढ़ते खनन से 4,642 कशेरुकी प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में

saurabh pandey
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मानवता की विकास की दौड़ विनाश की ओर ले जा रही है, जिससे न केवल इंसान बल्कि अन्य जीवों का अस्तित्व भी संकट में है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और शेफील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है। इस अध्ययन के अनुसार, तेल, गैस, और खनिजों के लिए हो रहे खनन और ड्रिलिंग के कारण दुनिया भर में 4,642 कशेरुकी प्रजातियों, जिसमें पक्षी और मछलियां शामिल हैं, का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

खनन की बढ़ती गतिविधियों का प्रभाव

खनन की गतिविधियां ऐसे क्षेत्रों में हो रही हैं जो जैव विविधता के हॉटस्पॉट हैं, और इनमें लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज शामिल हैं जो स्वच्छ ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं। सीमेंट के लिए चूना पत्थर का अत्यधिक खनन भी कई प्रजातियों को खतरे में डाल रहा है, और शहरीकरण के साथ इस मांग में वृद्धि हो रही है।

2022 में, प्रमुख खनन कंपनियों ने 94,300 करोड़ डॉलर का मुनाफा कमाया, और 2000 से 2018 के बीच, खनन गतिविधियों ने 78 प्रतिशत संरक्षित क्षेत्रों को प्रभावित किया। खनन की वजह से नदियों और बाढ़ के मैदानों में प्रदूषण भी फैल रहा है, जैसे कि 479,200 किलोमीटर लंबी नदियों और 164,000 वर्ग किलोमीटर बाढ़ के मैदानों में।

आर्थिक लाभ बनाम पर्यावरणीय हानि

शोधकर्ताओं के अनुसार, खनन की गतिविधियों का प्रभाव केवल खदानों तक सीमित नहीं है। दूषित पानी, सड़कों, और वनों की कटाई जैसे कारणों से दूरस्थ प्रजातियां भी प्रभावित हो रही हैं। उदाहरण के लिए, अमेजन में खनन से वन विनाश 70 किलोमीटर दूर तक हो सकता है। अंटार्कटिक को छोड़कर, धरती का 37 प्रतिशत हिस्सा खदानों के 50 किलोमीटर दायरे में आता है।

प्राकृतिक संसाधनों का स्थायी उपयोग

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता, प्रोफेसर डेविड एडवर्ड्स ने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा के लिए आवश्यक सामग्री का खनन आवश्यक है, लेकिन यह उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जो जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। खनन से होने वाले प्रदूषण को कम करने की जरूरत है, खासकर साफ पानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने से प्रजातियों की रक्षा की जा सकती है।

नीति और पुनर्चक्रण की आवश्यकता

अध्ययन ने जैव विविधता के लिए खनन के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन अन्य प्रजातियों और पेड़-पौधों पर भी खतरा मंडरा रहा है। खनन उद्योगों और सरकारों को खनन से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर ध्यान देना चाहिए और भविष्य की नीतियों में खनिजों के पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

वैश्विक खनन की गतिविधियां और बढ़ती शहरीकरण की मांग पर्यावरणीय संकट को बढ़ावा दे रही है। यह आवश्यक है कि विकास की इस दौड़ को संतुलित किया जाए ताकि जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके।

source and data – down to earth

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