गुजरात ने चीतों की नई खेप में रुचि दिखाई, बन्नी अभ्यारण्य में तैयारियां शुरू

saurabh pandey
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इस साल अक्टूबर-नवंबर में देश में आने वाली चीतों की नई खेप को लेकर राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद अब गुजरात ने भी तेंदुओं को बसाने की दिशा में गंभीर रुचि दिखाई है।

गुजरात के कच्छ जिले में स्थित बन्नी अभ्यारण्य में चीतों को बसाने के लिए आवश्यक तैयारियों को गति दी गई है। इन तैयारियों में फेंसिंग और बाड़ों का निर्माण शामिल है। अगर तेंदुओं की नई खेप आने तक गुजरात ने अपनी तैयारियों को पूरा कर लिया, तो संभावना है कि इस खेप में से कुछ तेंदुए गुजरात को भी मिल सकते हैं।

वर्तमान में, चीतों की नई खेप को मध्य प्रदेश के गांधी सागर या नौरादेही अभयारण्यों में रखने की योजना है। 2022 में नामीबिया से आठ और 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश के कूनो अभयारण्य में रखा गया है।

राजस्थान भी तेंदुओं को अपने क्षेत्र में बसाने के विचार में है, हालांकि वहां की तैयारी अभी शुरू नहीं हुई है। गुजरात की सक्रिय पहल से अब यह संभव हो सकता है कि नई खेप में से कुछ तेंदुए उसे भी मिलें। इस योजना के तहत अगले पांच साल में कुल 50 चीते लाने की योजना है। दक्षिण अफ्रीका और केन्या से भी बातचीत जारी है। हालांकि कूनो अभयारण्य में सात तेंदुओं की मौत ने परियोजना को झटका दिया, लेकिन अब वहां की तेंदुओं की संख्या 27 हो गई है, जिसमें 13 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। यह प्रगति परियोजना के लिए उत्साहजनक है।

तेंदुओं की नई खेप को लेकर विभिन्न राज्यों में होड़ तेज हो गई है। गुजरात ने अपनी सक्रियता और तैयारियों के जरिए तेंदुओं को अपने क्षेत्र में बसाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कच्छ के बन्नी अभ्यारण्य में की जा रही तैयारियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यदि गुजरात अपनी तैयारियों को समय पर पूरा कर लेता है, तो उसे तेंदुओं की नई खेप में से कुछ तेंदुए मिल सकते हैं।

मध्य प्रदेश और राजस्थान पहले से तेंदुओं को अपने अभयारण्यों में बसाने की योजना पर काम कर रहे हैं, जबकि गुजरात ने अब इस प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि गुजरात को भी तेंदुओं की नई खेप में से कुछ मिल सकते हैं।

गुजरात की पहल और तैयारियों के साथ, तेंदुओं की चीता परियोजना को एक नया मोड़ मिल सकता है, जो न केवल तेंदुओं के संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि इस प्रजाति के पुनर्वास के प्रयासों को भी गति प्रदान करेगा।

Source and data – दैनिक जागरण

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