सरकार ने किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी देने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति’ कार्यक्रम में घोषणा की कि केंद्र सरकार प्राकृतिक खेती के लिए सब्सिडी देने पर विचार कर रही है। सरकार अगले तीन साल तक मुआवजे के लिए किसानों के बैंक खातों में रकम भेजेगी और प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण की भी व्यवस्था की जाएगी।
रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाव
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रसायनों और उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से कृषि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी स्पष्ट हैं। आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की चिंता कर रही है। रसायनों के उपयोग से फसलें बर्बाद हो रही हैं और धरती की उर्वराशक्ति भी घट रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर इन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बीमारियों में भी कमी आएगी।
प्राकृतिक खेती के लाभ
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि पानी की जरूरत 50-60 फीसदी कम होती है। ग्लोबल वार्मिंग का असर भी कम होता है। तेलंगाना और बंगाल के कृषि वैज्ञानिकों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्पादित गेहूं और चावल में 45 फीसदी पोषक तत्व नहीं होते हैं। रासायनिक खेती से पोषक तत्वों की कमी के कारण लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। नाइट्रोजन युक्त खाद ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर नाइट्रोजन ऑक्साइड बनाती है, जो कार्बन डाइऑक्साइड से 312 गुना ज्यादा खतरनाक है।
उच्च स्तरीय कार्यक्रम
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलाख तथा 12 राज्यों के कृषि विभाग के अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित थे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न तो उत्पादन कम होता है और न ही भंडारण में कमी आती है। यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है और किसानों की आय को बढ़ाने में मदद करेगी।
source – दैनिक जागरण