भले ही विश्व स्तर पर भूख और खाद्य सुरक्षा की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन आज भी करोड़ों लोग भूख का शिकार हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 83 करोड़ लोग हर दिन भूखे सोते हैं, और भारत में यह संख्या 19 करोड़ तक पहुंच गई है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने खाद्य पदार्थों की बर्बादी को रोकने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है।
कार्बन डॉट्स की खोज
बीएयू के वैज्ञानिकों ने केले के छिलके से कार्बन डॉट्स का विकास किया है, जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। यह नवाचार न केवल खाद्य बर्बादी को कम करेगा, बल्कि भूखमरी के खिलाफ भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने ताजा नीरा के संग्रह के लिए विशेष कंटेनर बनाए हैं, जो किण्वन को रोकने में मदद करेंगे, जिससे स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकेगी।
खाद्य अपशिष्ट में कमी
बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने विभिन्न अनुसंधानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए खाद्य अपशिष्ट को कम करने के लिए कई अभिनव तकनीकें विकसित की हैं। इनमें हर्मेटिक बैग का उपयोग शामिल है, जो अनाज को खराब होने से बचाने में सहायक होता है।
नए उत्पादों का विकास
इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने आम और केले के छिलके के माध्यम से बनाए गए कार्बन डॉट्स का उपयोग कर खाद्य कोटिंग विकसित की है, जिससे फलों और सब्जियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रकार के नवाचार खाद्य बर्बादी को कम करने और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
भविष्य की दिशा
डॉ. मोहम्मद वसीम सिद्दीकी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है। बीएयू और विश्व खाद्य संरक्षण केंद्र के सहयोग से इस दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, और ये नवाचार भविष्य में खाद्य बर्बादी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस प्रकार के नवाचार न केवल भूखमरी के मुद्दे को संबोधित करेंगे, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेंगे। वैज्ञानिकों की यह पहल दर्शाती है कि अगर हम सच्चे प्रयास और तकनीकी नवाचारों का उपयोग करें, तो हम भूख और खाद्य बर्बादी जैसी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
इस नवाचार के माध्यम से बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने खाद्य सुरक्षा और बर्बादी की समस्या को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कार्बन डॉट्स के विकास और अन्य तकनीकी उपायों से न केवल खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा रही है, बल्कि यह भूखमरी को भी कम करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। वैज्ञानिकों की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी नवाचार और अनुसंधान के जरिए हम खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं और भूख की समस्या का समाधान कर सकते हैं। इस दिशा में आगे बढ़कर, समाज के सभी वर्गों को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि हम एक अधिक स्थायी और सुरक्षित खाद्य प्रणाली का निर्माण कर सकें।