दिल्ली के इको-सिस्टम पर इस समय भारी दबाव है, यही वजह है कि बारिश होते ही राजधानी नदी में तब्दील हो जाती है। पिछले महीने लोग जल संकट से परेशान रहे। सर्दी शुरू होते ही प्रदूषण की मार भी पड़ने वाली है। ऐसा हर साल होता है। अंधाधुंध दोहन के कारण अरावली पर्वत श्रृंखला और यमुना भी बुरी हालत में हैं। जहां पूर्व में यमुना और अरावली पर्वत श्रृंखला ने शहर को सुरक्षा प्रदान की थी, अब इको-सिस्टम बेजान हो गया है।
921 हेक्टेयर में फैले सात बायोडायवर्सिटी पार्क दिल्ली के लिए किडनी का काम कर रहे हैं। इन पार्कों में 2500 प्रजातियों के जीव-जंतु हैं, जिनमें सैकड़ों दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल हैं। सबसे पुराने यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में ऊंचे पेड़, झाड़ियां और घास के मैदानों की तीन परतें हैं। वर्ष 2000 में ये बंजर भूमि हुआ करती थी, पर अब विकसित जंगल बन चुके हैं।
पार्कों की भूमिका
दिल्ली के 921 हेक्टेयर में फैले सात बायोडायवर्सिटी पार्कों से इको-सिस्टम को बेहतर बनाने की उम्मीद है। इनमें पेड़-पौधे, घास के मैदान, वेटलैंड और जीव-जंतुओं की विविधता है। ये पार्क न सिर्फ खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि अपने इलाकों में हवा और पानी की गुणवत्ता भी सुधारते हैं। पार्क के आसपास रहने वाले लोग इसे स्वीकार करते हैं और स्वच्छ सांस ले पाते हैं।
प्रमुख बायोडायवर्सिटी पार्क
- यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क: 184 हेक्टेयर
- नीला तालाब: 03 हेक्टेयर
- तिलपाल घाटी: 70 हेक्टेयर
- अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क: 280 हेक्टेयर
- कमला नेहरू रिज: 87 हेक्टेयर
- तुगलकाबाद: 130 हेक्टेयर
- कालिंदी कुंज: 167 हेक्टेयर
पार्कों के पास बेहतर वायु गुणवत्ता
यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के पास गोपालपुर गांव है। यहां रहने वाली लीशा सिंह कहती हैं कि यहां की हवा दूसरे इलाकों से बेहतर है। सर्दियों में जब दूसरे इलाकों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर रहता है, तो हम 100-150 AQI में सांस लेते हैं। वसंत विहार के पास अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क के 90 वर्षीय विजय प्रकाश मित्तल कहते हैं कि पार्क के आसपास की हवा साफ हो गई है। प्रदीप बहल का मानना है कि कमला नेहरू रिज के पास अरावली पर्वतमाला हमारे लिए जीवन रेखा है।
भूजल स्तर में सुधार
जगतपुर के वरुण कुमार बताते हैं कि पहले यहां 130-150 फीट नीचे पानी मिलता था। अब भूजल स्तर 40-50 फीट के बीच है और इसकी गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
दिल्ली का इको-सिस्टम दबाव में है, लेकिन 921 हेक्टेयर में फैले सात बायोडायवर्सिटी पार्क शहर के लिए किडनी की तरह काम कर रहे हैं। ये पार्क न केवल प्रकृति का संरक्षण कर रहे हैं बल्कि पेयजल संवर्धन और प्रदूषण के समाधान भी प्रदान कर रहे हैं। दिल्ली के इको-सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए और अधिक बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करना आवश्यक है।
डीडीए बायोडायवर्सिटी पार्क एक ऐसा ब्लू ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर है जो न केवल प्रकृति का संरक्षण कर रहा है बल्कि पेयजल संवर्धन और प्रदूषण का समाधान भी प्रदान कर रहा है।
source- अमर उजाला
