पेट्रोल पंप और पेट्रोल भंडारण केंद्रों से निकलने वाली खतरनाक गैसों को नियंत्रित करने के लिए वैपर रिकवरी सिस्टम न लगाने के कारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर एक करोड़ रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। रिलायंस ने इस आदेश के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर दी है, जिसमें आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। कंपनी का कहना है कि इसे बिना किसी कारण बताओ नोटिस के ही जुर्माना लगाया गया है।
वैपर रिकवरी सिस्टम की महत्वता
‘वैपर रिकवरी सिस्टम’ तकनीक का उपयोग पेट्रोलियम भंडारण टैंकों से निकलने वाली खतरनाक गैसों को कैप्चर करने के लिए किया जाता है। पेट्रोलियम भंडारण के दौरान बेंजीन और जाइलीन जैसी हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
एनजीटी और सीपीसीबी के आदेश
19 जुलाई को रिलायंस इंडस्ट्रीज की याचिका पर एनजीटी में सुनवाई हुई। रिलायंस का कहना है कि 13 जून, 2024 को सीपीसीबी ने आदेश जारी किया था कि कंपनी एनसीआर में पेट्रोल पंप और स्टोरेज टर्मिनल पर वैपर रिकवरी सिस्टम लगाने में विफल रही है। इसी कारण कंपनी को एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया।
एनजीटी ने 22 नवंबर, 2018 को सभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 30 अप्रैल, 2019 तक एनसीआर में पेट्रोल पंप और स्टोरेज टर्मिनल में वैपर रिकवरी सिस्टम लगाने का आदेश दिया था। सीपीसीबी को समय रहते आदेश का पालन न होने पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाने का भी निर्देश दिया गया था।
रिलायंस की दलीलें
रिलायंस के अधिवक्ता ने तर्क किया कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने भी इसी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा बढ़ा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 14 मार्च, 2023 को आईओसीएल के मामले में सीपीसीबी से एनजीटी के आदेश का पालन करने को कहा था।
मामले की आगामी सुनवाई
रिलायंस के मामले में सीपीसीबी के अधिवक्ता ने कहा कि वे यह देखेंगे कि जुर्माना संबंधी आदेश से पहले कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था या नहीं। इसके लिए उन्हें चार हफ्तों का समय चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त, 2024 को होगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर सीपीसीबी द्वारा लगाए गए एक करोड़ रुपए के पर्यावरणीय जुर्माने ने फिर से प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर किया है। पेट्रोल पंप और भंडारण केंद्रों पर वैपर रिकवरी सिस्टम की अनिवार्यता को लेकर उठाए गए कदम, जैसे कि यह जुर्माना, खतरनाक गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हैं। रिलायंस की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करने और जुर्माने के खिलाफ तर्क देने से यह संकेत मिलता है कि पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक संघर्ष जारी रहेगा। मामले की अगली सुनवाई इस बात को स्पष्ट करेगी कि जुर्माना के पीछे के कानूनी और प्रक्रियात्मक मुद्दों को किस प्रकार हल किया जाता है और यह अन्य कंपनियों को पर्यावरणीय नियमों के प्रति और कितनी सतर्कता अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
Source- down to earth
