गायों को जहरीला कचरा चरने की इजाजत नहीं दी जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

saurabh pandey
3 Min Read

दिल्ली हाईकोर्ट ने गाजीपुर लैंडफिल साइट के आसपास संचालित डेयरियों से संबंधित मामले पर सुनवाई करते हुए कहा है कि गायों को जहरीला कचरा चरने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अगली पीढ़ी के लिए डेयरियों का बुनियादी ढांचा विकसित करना हमारी जिम्मेदारी है और दिल्ली में लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाला दूध मिलना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि गायें जहरीला कचरा नहीं खा सकतीं और उन्हें कैंसर होने का खतरा नहीं हो सकता। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, कोर्ट ने डेरी मालिकों द्वारा इस मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग वाली अर्जी पर आदेश पारित करने का आश्वासन दिया।

मवेशियों के लिए बुनियादी ढांचा

दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे 10 दिन के भीतर घोघा में मवेशियों के लिए बैरक बनाने के लिए जमीन आवंटित करें। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि डेरी के लिए आवंटित जमीन पर व्यावसायिक शोरूम खुले हैं, जो उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वे बड़े उद्देश्य के लिए पैसे रोक रहे हैं और वहां बायोगैस प्लांट जैसी सुविधाओं की स्थापना की आवश्यकता है।

भलस्वा डेयरी के डेयरी मालिकों की याचिका

भलस्वा डेयरी के डेयरी मालिकों ने कोर्ट में अवैध निर्माणों को गिराने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि भलस्वा डेयरी की जमीन पर अतिक्रमणकारी नहीं हैं और वे कोर्ट के उस आदेश से प्रभावित हैं, जिसमें डेयरी को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। डेरी मालिकों का तर्क है कि इसमें मानवीय और मानवाधिकारों का मुद्दा शामिल है और मवेशियों की जान भी इसमें शामिल है।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश ने डेयरी उद्योग और संबंधित बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। गायों की सुरक्षा और अच्छी गुणवत्ता वाले दूध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए उचित बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, अधिकारियों को मवेशियों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।

Source and data – दैनिक जागरण

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *