बढ़ते तापमान के साथ त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ना एक वास्तविकता है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि लोग जागरूक हों और अपनी त्वचा की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएँ। नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना भी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास भी जरूरी हैं।
अधिकतम तापमान बढ़ने से त्वचा कैंसर का खतरा एक गंभीर चिंता का विषय है। यह न केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी महत्वपूर्ण है। बढ़ते तापमान के प्रभाव और इसके त्वचा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित है:
तापमान वृद्धि और स्वास्थ्य
पारा वृद्धि: जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। उच्च तापमान सीधे तौर पर स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, खासकर त्वचा को।
शरीर की प्रतिक्रिया: सामान्य तौर पर, मानव शरीर 37 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन कर सकता है। इससे अधिक तापमान होने पर शरीर की शीतलन प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
त्वचा कैंसर का खतरा
मेलेनोमा त्वचा कैंसर: भारतीयों में मेलेनोमा त्वचा कैंसर का तेजी से फैलना एक चिंताजनक तथ्य है। मेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक प्रकार है, जो त्वचा की रंगीन कोशिकाओं में बनता है।
सूर्य के संपर्क में वृद्धि: बढ़ते तापमान के कारण लोग अधिक समय धूप में बिताते हैं, जिससे त्वचा पर सूर्य की हानिकारक किरणों का प्रभाव बढ़ता है। यह त्वचा कैंसर का मुख्य कारण है।
निवारक उपाय
सुरक्षा के उपाय: विशेषज्ञों का सुझाव है कि धूप में कम समय बिताया जाए, सनस्क्रीन का उपयोग किया जाए, और हल्के रंग के कपड़े पहने जाएँ। ये उपाय त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचा सकते हैं।
स्वास्थ्य देखभाल: त्वचा पर किसी भी असामान्य तिल, मौसों, खुजली या रक्तस्राव के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
विशेष स्वास्थ्य सुझाव
पानी और पोषण: गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।
समय का प्रबंधन: दिन के सबसे गर्म समय में बाहर जाने से बचना और अगर जाना भी पड़े तो उचित सुरक्षा उपाय अपनाना चाहिए।
नई दिल्ली। पारा बढ़ने से त्वचा कैंसर की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है कि बढ़ते तापमान से त्वचा के कैंसर के मामलों में वृद्धि हो सकती है। त्वचा के कैंसर के मामलों में वृद्धि न केवल भारतीयों में बल्कि दुनिया भर में देखी जा रही है। भारतीयों में मेलेनोमा त्वचा कैंसर तेजी से फैल रहा है। मेलेनोमा त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है, जो त्वचा की रंगीन कोशिकाओं में बनता है।
डॉ. इंद्रा ईशरानी का कहना है कि 37 डिग्री सेल्सियस तापमान को नियंत्रित कर सकता है शरीर, लेकिन अगर तापमान इससे अधिक हो जाता है तो यह त्वचा के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के संपर्क में आने से त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है और इससे त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. ईशरानी ने सलाह दी कि इस बढ़ते तापमान में अपनी त्वचा की सुरक्षा के लिए धूप में कम से कम समय बिताएं, सूर्य के संपर्क में आने से बचें, और अगर धूप में जाना भी पड़े तो उचित सुरक्षा उपाय करें जैसे कि सनस्क्रीन लगाना, हल्के रंग के कपड़े पहनना और धूप के चश्मे का उपयोग करना।
विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा पर असामान्य तिल या मौसों की संख्या बढ़ने, उनके आकार या रंग में बदलाव, खुजली या रक्तस्राव होना त्वचा कैंसर के संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
37 डिग्री तापमान को नियंत्रित कर सकता है शरीर
महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर सामान्य रूप से 37 डिग्री सेल्सियस तापमान को सहन कर सकता है, लेकिन जब तापमान इससे अधिक हो जाता है, तो शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रणाली प्रभावित होती है। इससे शरीर में गर्मी की थकावट, हीट स्ट्रोक और त्वचा के विभिन्न प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों का सुझाव है कि बढ़ते तापमान के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, संतुलित आहार लें, और अगर संभव हो तो दिन के सबसे गर्म समय में घर के अंदर ही रहें। अपने शरीर को ठंडा रखने के लिए उपयुक्त वस्त्र पहनें और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करें।
डॉक्टरों के मुताबिक किस अंग पर क्या नुकसान
त्वचा: बढ़ते तापमान से त्वचा जल सकती है और सनबर्न हो सकता है। इससे त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
आँखें: तेज धूप से आंखों की रोशनी पर प्रभाव पड़ सकता है और धूप के चश्मे का उपयोग करना चाहिए।
बाल: बढ़ती गर्मी से बालों की नमी खो जाती है और वे सूखकर टूटने लगते हैं।
ह्रदय: उच्च तापमान से ह्रदय की धड़कन तेज हो सकती है और यह हृदय के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
तापमान बढ़ने के साथ ही अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सावधान रहें और नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्श लें।
