तितलियों का संदेश: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को बेअसर कर सकते हैं जैव विविधता पार्क

saurabh pandey
4 Min Read

दिल्ली के जैव विविधता पार्क, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सक्षम हो रहे हैं। तापमान में बढ़ोतरी के बावजूद तितलियों की प्रजातियों की संख्या में कमी नहीं आई है, जो इस बात का संकेत है कि ये पार्क पर्यावरणीय बदलावों के अनुकूल ढलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

तितलियों की प्रजातियाँ और सर्वेक्षण का महत्व

डीडीए के सात जैव विविधता पार्कों में 68 प्रजातियों की 8,337 तितलियाँ पाई गईं, जिनमें देश के पाँच प्रमुख तितली परिवार शामिल हैं। तितलियों को वायु प्रदूषण, तापमान, वर्षा और पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इनकी संख्या और गतिविधियों की नियमित निगरानी कर रहे हैं। इन पार्कों में तितलियों की विविधता का स्थिर रहना एक सकारात्मक संकेत है।

पार्कवार तितलियों की स्थिति

  • अरावली जैव विविधता पार्क: सर्वाधिक 58 प्रजातियाँ पाई गईं।
  • कालिंदी जैव विविधता पार्क: सबसे कम 18 प्रजातियाँ दर्ज की गईं।
  • सबसे अधिक पाई जाने वाली प्रजातियाँ: प्लेन टाइगर, कॉमन इमिग्रेंट, येलो ऑरेंज टिप, लेमन पैंसी, कॉमन ग्रास येलो।

जैव विविधता पार्क का महत्व

तितलियाँ न केवल परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि उनकी उपस्थिति पर्यावरणीय परिवर्तनों का संकेत भी देती है। पार्कों में तितलियों की गतिविधियों जैसे अंडे देना, प्रजनन और धूप सेंकना इस बात का प्रमाण हैं कि ये स्थान जलवायु परिवर्तन के अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं।

तितलियों के संरक्षण का संदेश

तितलियों की स्थिर संख्या से पता चलता है कि शहरी केंद्रों में विकसित जैव विविधता पार्क जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। अरावली, यमुना, तिलपत घाटी, तुगलकाबाद, और अन्य जैव विविधता पार्क पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए जीवंत प्रयोगशालाओं के रूप में काम कर रहे हैं।

दिल्ली के जैव विविधता पार्क यह संदेश दे रहे हैं कि प्राकृतिक आवास को संरक्षित करके हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपट सकते हैं। यह पहल न केवल तितलियों, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इन पार्कों को और अधिक संरक्षित एवं विकसित करना प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। डॉ. फैयाज खुदसर, प्रभारी वैज्ञानिक, का कहना है कि इन पार्कों में जलवायु अनुकूलन की क्षमता मौजूद है और यह तितलियों व अन्य जीवों के संरक्षण के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करते हैं।

दिल्ली के जैव विविधता पार्क इस बात का प्रमाण हैं कि प्राकृतिक आवास में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने की क्षमता होती है। तितलियों की स्थिर प्रजातीय विविधता से पता चलता है कि यदि सही पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित किया जाए, तो पर्यावरणीय अस्थिरता के प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

तितलियाँ न केवल परागण में अहम भूमिका निभाती हैं, बल्कि उनकी संख्या और गतिविधियाँ पर्यावरण में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों की चेतावनी भी देती हैं। इसलिए, जैव विविधता पार्क न केवल शहरी इलाकों के लिए हरित क्षेत्र उपलब्ध कराते हैं, बल्कि जलवायु अनुकूलन और संरक्षण के मॉडल भी हैं।

इन पार्कों का संरक्षण और विस्तार हमारे भविष्य के पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि हम जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों का सही ढंग से प्रबंधन करें, तो जलवायु परिवर्तन के खतरों को बेअसर कर एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण संभव है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *