भारत के जलाशयों में जल स्तर सामान्य से 14% अधिक पहुंच चुका है, जिससे देश के 155 प्रमुख जलाशयों में पानी की उपलब्धता में वृद्धि देखी जा रही है। यह जानकारी केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल जलाशयों में से 86 जलाशय अपनी क्षमता के 88% तक भर चुके हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है। यह जल संग्रहण का स्तर पिछले दस वर्षों के औसत 139.114 बीसीएम की तुलना में भी उच्च है।
जल संग्रहण की क्षेत्रीय स्थिति
देश के विभिन्न हिस्सों में जलाशयों के जल संग्रहण में भिन्नताएं देखने को मिल रही हैं। पश्चिमी क्षेत्र, जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा शामिल हैं, जलाशयों में 97% जल संग्रहण के साथ सबसे बेहतर स्थिति में है। यह पिछले वर्ष के 89% के मुकाबले काफी बेहतर है। इसके विपरीत, मध्य क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़) में जल संग्रहण में गिरावट आई है। पूर्वी क्षेत्र में, जिसमें असम, ओडिशा और बिहार शामिल हैं, जलाशयों में 86% जल संग्रहण दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के 77% से बेहतर है।
दुनिया की नदियों का जलस्तर घटा
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 में दुनिया की प्रमुख नदियों, जिनमें भारत की गंगा और ब्रह्मपुत्र शामिल हैं, का जल स्तर पिछले 33 वर्षों में सबसे कम दर्ज किया गया। इसका सीधा असर इन क्षेत्रों में जल उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 50% से अधिक नदी क्षेत्र असामान्य स्थिति का सामना कर रहे थे, और एशिया की प्रमुख नदियों में सामान्य से कम जलस्तर देखा गया।
भविष्य में जल संकट की आशंका
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हिमालय क्षेत्र से निकलने वाली गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों का जल स्तर आने वाले दशकों में ग्लेशियरों के पिघलने और बर्फ की चादरों के पीछे हटने के कारण और कम हो सकता है। इससे लगभग 1.3 अरब लोगों पर जल संकट का खतरा मंडरा सकता है, जो इन नदियों पर अपनी जल आवश्यकताओं के लिए निर्भर हैं।
बढ़ता तापमान और जल चक्र असंतुलन
बढ़ता हुआ वैश्विक तापमान दुनिया भर के जल चक्र को असंतुलित कर रहा है। कई क्षेत्र या तो अत्यधिक वर्षा से बाढ़ का सामना कर रहे हैं, या फिर पानी की कमी से सूखे की चपेट में हैं। अत्यधिक वर्षा और बाढ़ के कारण कई जगहों पर भूजल स्तर भी घट रहा है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का स्पष्ट संकेत है, जिससे आने वाले समय में जल संकट गहराने की संभावना है।
सीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट भारत में जलाशयों की बेहतर स्थिति की ओर इशारा करती है, लेकिन क्षेत्रीय असमानताएं और विश्व भर में घटते जल स्तर चिंताजनक हैं। हिमालयी नदियों पर निर्भर क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।